प्रस्तावना:

भारतीय अध्यात्म और तंत्र साधना में दस महाविद्याओं का सर्वोच्च स्थान है। इनमें आठवीं महाविद्या ‘माँ बगलामुखी’ हैं, जिन्हें ‘पीतांबरा’ के नाम से भी जाना जाता है। माँ बगलामुखी की उत्पत्ति और उनके स्वरूप की कथा अत्यंत प्रेरणादायक और शक्तिशाली है।

उत्पत्ति की पौराणिक कथा:

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में एक समय भीषण तूफान आया और पूरी सृष्टि नष्ट होने के कगार पर पहुँच गई। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र (गुजरात) में ‘हरिद्रा सरोवर’ के तट पर कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महाशक्ति माँ बगलामुखी हल्दी के रंग के जल से प्रकट हुईं और उन्होंने उस प्रलय को शांत कर दिया।

माँ बगलामुखी का स्वरूप और महत्व:

निष्कर्ष:

मान्यता है कि महाभारत के युद्ध से पूर्व पांडवों ने भी मध्य प्रदेश के नलखेड़ा में माता की साधना की थी। माँ बगलामुखी की भक्ति जीवन के सभी अवरोधों को दूर कर विजय का मार्ग प्रशस्त करती है।